विशेषज्ञ मानते हैं कि साल 2026 विश्व अर्थव्यवस्था (Global Economy in 2026) के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण रहेगा। अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के साथ आसियान (ASEAN) की भी रफ्तार धीमी होगी जिसका असर चीन के निर्यात पर पड़ेगा। अमेरिकी डॉलर में गिरावट का ट्रेंड फिर से शुरू होने का अनुमान है। हालांकि यह गिरावट अलग-अलग करेंसी के लिए अलग होगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 2026 में विश्व अर्थव्यवस्था के लिए 3.1 प्रतिशत ग्रोथ का अनुमान लगाया है।
हालांकि विश्व व्यापार में कुछ गिरावट का अंदेशा है। ग्लोबल रिसर्च फर्म नेटिक्सिस की चीफ इकोनॉमिस्ट (एशिया-पैसिफिक) एलिसिया गार्सिया हेरेरो ने जागरण प्राइम से कहा, “2025 में ट्रेड में ज्यादातर तेजी टैरिफ के डर की वजह से थी। पहली छमाही में फ्रंट लोडिंग बहुत हुई, और फिर अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने भी उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। लेकिन मुझे लगता है कि 2026 में यह मुश्किल होगा। ताइवान को लेकर भूराजनीतिक जोखिम बहुत अधिक है। इसकी वजह से चीन-जापान के बीच भी तनाव बढ़ रहा है। अगले साल ज्यादा तो नहीं, लेकिन ग्लोबल ट्रेड थोड़ा धीमा होगा।”
क्यों कम रहा अमेरिकी टैरिफ का असर
ब्रिटिश थिंक टैंक चैथम हाउस में ग्लोबल इकोनॉमी और फाइनेंस प्रोग्राम के डायरेक्टर क्रेयॉन बटलर के अनुसार, ग्लोबल इकोनॉमी के लिए 2025 में सबसे बड़ा सरप्राइज यह था कि डोनाल्ड ट्रंप ने असल में वही किया जो उन्होंने चुनाव के दौरान कहा था। हालांकि अमेरिका का औसत टैरिफ रेट 1930 के दशक के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर होने के बावजूद विश्व अर्थव्यवस्था को अनेक लोगों के अनुमान से कम नुकसान हुआ है। प्रमुख इक्विटी मार्केट हाल ही ऑल-टाइम हाई पर पहुंचे। यह मजबूती कुछ हद तक इसलिए है क्योंकि दूसरे देशों ने ट्रंप टैरिफ का जवाब नहीं दिया। अमेरिका में AI इन्वेस्टमेंट बूम और अमेरिकी डॉलर कमजोर होने का भी असर रहा।
क्यों कम रहा अमेरिकी टैरिफ का असर
ब्रिटिश थिंक टैंक चैथम हाउस में ग्लोबल इकोनॉमी और फाइनेंस प्रोग्राम के डायरेक्टर क्रेयॉन बटलर के अनुसार, ग्लोबल इकोनॉमी के लिए 2025 में सबसे बड़ा सरप्राइज यह था कि डोनाल्ड ट्रंप ने असल में वही किया जो उन्होंने चुनाव के दौरान कहा था। हालांकि अमेरिका का औसत टैरिफ रेट 1930 के दशक के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर होने के बावजूद विश्व अर्थव्यवस्था को अनेक लोगों के अनुमान से कम नुकसान हुआ है। प्रमुख इक्विटी मार्केट हाल ही ऑल-टाइम हाई पर पहुंचे। यह मजबूती कुछ हद तक इसलिए है क्योंकि दूसरे देशों ने ट्रंप टैरिफ का जवाब नहीं दिया। अमेरिका में AI इन्वेस्टमेंट बूम और अमेरिकी डॉलर कमजोर होने का भी असर रहा।